भारत संवाद

पृष्ठ ०६ · व्यापार विशेष रिपोर्ट सोमवार, २५ मई २०२६ · bharatsamvad-epaper
भू-स्थानिक इंटेलिजेंस · अंतरिक्ष-तकनीक

उपग्रह डेटा की वैश्विक भूख: भारतीय स्टार्टअप बने पृथ्वी-अवलोकन सेवाओं के उभरते वैश्विक प्रदाता

अधिक उपग्रहों और प्रक्षेपण-यानों के साथ Pixxel, GalaxEye और Agnikul Cosmos जैसे भारतीय स्टार्टअप कृषि, खनन, जलवायु, समुद्री निगरानी और रक्षा क्षेत्रों के लिए भू-स्थानिक इंटेलिजेंस की बढ़ती वैश्विक माँग पूरी कर रहे हैं।

व्यापार डेस्क · विशेष रिपोर्ट

भारत का निजी अंतरिक्ष-तकनीक क्षेत्र तेज़ी से व्यावसायिक रूप ले रहा है। देश के स्टार्टअप अपने उपग्रह-समूह (कॉन्स्टेलेशन) का विस्तार कर रहे हैं और कृषि, खनन, जलवायु-निगरानी, तेल-गैस, समुद्री निगरानी तथा रक्षा जैसे क्षेत्रों में भू-स्थानिक इंटेलिजेंस की तलाश करने वाले वैश्विक ग्राहकों को अपनी सेवाएँ दे रहे हैं।

हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग कंपनी Pixxel से लेकर पृथ्वी-अवलोकन तकनीक विकसित करने वाली GalaxEye और प्रक्षेपण-यान बनाने वाली Agnikul Cosmos तक — भारतीय कंपनियाँ अब महत्वपूर्ण भू-स्थानिक इंटेलिजेंस ढाँचे के प्रदाता के रूप में उभर रही हैं। इसी रुझान का असर निवेश पर भी दिख रहा है: 2025 में इस निजी अंतरिक्ष-तकनीक पारिस्थितिकी ने लगभग 12 से 15 करोड़ डॉलर का वित्त-पोषण आकर्षित किया।

माँग कहाँ से, और क्यों

Pixxel के संस्थापक-सीईओ अवैस अहमद के अनुसार माँग का एक बड़ा हिस्सा उत्तर अमेरिका, यूरोप और मध्य-पूर्व से आ रहा है, ख़ासकर वहाँ जहाँ पारंपरिक उपग्रह-चित्र अब पर्याप्त नहीं रह गए। उनका कहना है कि बाज़ार अब केवल 'चित्रों' से आगे बढ़कर 'निर्णय-आधारित इंटेलिजेंस' की ओर बढ़ रहा है — यानी ग्राहक ऐसी तेज़ और व्यावहारिक जानकारी चाहते हैं जो सीधे संचालन, जोखिम-आकलन और दीर्घकालिक योजना को प्रभावित कर सके।

Pixxel विश्व भर में 75 से अधिक एंटरप्राइज़ ग्राहकों के साथ काम कर रही है, जिनमें खनन कंपनी रियो टिंटो और एग्रिटेक कंपनी DataFarming शामिल हैं, साथ ही 80 से अधिक वैश्विक साझेदार भी। कंपनी आने वाले वर्षों में 25 से अधिक उपग्रह तैनात करने की योजना बना रही है, ताकि लगभग वास्तविक-समय निगरानी और अधिक बार-बार अवलोकन (हाई रिविज़िट) संभव हो सके।

निगरानी का बढ़ता दायरा

उपग्रह डेटा का उपयोग अब पारंपरिक मैपिंग और निगरानी से कहीं आगे बढ़ चुका है। कृषि में इसका प्रयोग फ़सल-निगरानी, तनाव-पहचान, उपज-अनुमान और बीमा-आकलन के लिए हो रहा है; खनन तथा तेल-गैस क्षेत्र में पर्यावरणीय अनुपालन, पाइपलाइन-निगरानी और ढाँचागत ट्रैकिंग के लिए; जबकि जलवायु से जुड़े उपयोगों में मीथेन-पहचान, जल-गुणवत्ता विश्लेषण और वन-निगरानी तेज़ी से अपनाई जा रही है।

GalaxEye के संस्थापक-सीईओ सुयश सिंह के अनुसार रक्षा और ख़ुफ़िया क्षेत्र आज भी उपग्रह डेटा के सबसे बड़े उपयोगकर्ता बने हुए हैं, यद्यपि व्यावसायिक माँग भी तेज़ी से बढ़ रही है। GalaxEye ऑप्टिकल और सिंथेटिक अपर्चर रडार (SAR) को जोड़ने वाले बहु-संवेदक (मल्टी-सेंसर) इमेजिंग तंत्र बना रही है और दशक के अंत तक 15 से 20 उपग्रह तैनात करने की योजना रखती है — इससे हर तीन-चार घंटे में वैश्विक अवलोकन संभव होगा, जो विश्लेषण-क्षमता और AI-आधारित जानकारियों को और मज़बूत करेगा।

भारत की अंतरिक्ष-तकनीक · एक नज़र में

  • वित्त-पोषण (2025) — निजी अंतरिक्ष-तकनीक में ~12–15 करोड़ डॉलर
  • Pixxel — हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग; 25+ उपग्रह तैनात करने की योजना
  • GalaxEye — ऑप्टिकल + SAR; दशक के अंत तक 15–20 उपग्रह
  • Agnikul Cosmos — हाल ही में 1.7 करोड़ डॉलर जुटाए, मूल्यांकन 50 करोड़ डॉलर से अधिक
  • Red Balloon Aerospace — समतापमंडल (20–50 कि.मी.) में पुनः-प्राप्त करने योग्य मंच
  • उभरते उपयोग — अंतरिक्ष-आधारित डेटा सेंटर, तीव्र प्रक्षेपण प्रणालियाँ

संस्थापकों का कहना है कि क्षेत्र का व्यापक रुझान निष्क्रिय (पैसिव) पृथ्वी-अवलोकन से हटकर 'सतत इंटेलिजेंस तंत्र' की ओर है — ऐसे उपग्रह जो लगातार बदलावों पर नज़र रख सकें।

"उपग्रह अब ऐसे तंत्र बनते जा रहे हैं जो पर्यावरणीय, औद्योगिक और भू-राजनीतिक बदलावों की वृहद् स्तर पर सतत निगरानी कर सकें।" — अवैस अहमद, संस्थापक-सीईओ, Pixxel (आशय)

समतापमंडल का अवसर

यह अवसर केवल कक्षीय (ऑर्बिटल) उपग्रहों तक सीमित नहीं है। Red Balloon Aerospace पृथ्वी से 20 से 50 कि.मी. ऊपर के निकट-अंतरिक्ष (समतापमंडलीय) स्तर पर काम कर रही है और सतत निगरानी के लिए पुनः-प्राप्त किए जा सकने वाले उच्च-ऊँचाई मंच विकसित कर रही है। कंपनी के सह-संस्थापक एवं सीईओ सी.वी.एस. किरण के अनुसार कम-लागत वाली, सतत समतापमंडलीय कवरेज एक वैश्विक ढाँचागत आवश्यकता है। कंपनी का पहला 'VISTA' सुपर-प्रेशर बैलून प्रक्षेपण 2026 की दूसरी तिमाही में प्रस्तावित है, जो अंतरराष्ट्रीय और घरेलू दोनों पेलोड ले जाएगा।

निवेशकों का बढ़ता भरोसा

2020 में अंतरिक्ष क्षेत्र निजी कंपनियों के लिए खुलने के बाद से, बढ़ती व्यावसायिक माँग ने निवेशकों के मूल्यांकन का तरीक़ा बदल दिया है। अब फ़्लाइट-हेरिटेज, विनिर्माण-क्षमता, व्यावसायिक अनुबंध और तैनाती-स्तर पर ज़ोर है। उद्यमियों का कहना है कि वास्तविक व्यावसायिक तैनाती और ग्राहक-स्वीकृति यह सिद्ध करती है कि ये तकनीकें अब प्रयोगात्मक परियोजनाएँ नहीं, बल्कि भरोसेमंद ढाँचागत व्यवसाय बन रही हैं।

Agnikul Cosmos के सह-संस्थापक एवं सीईओ श्रीनाथ रविचंद्रन के अनुसार वैश्विक कॉन्स्टेलेशन ऑपरेटर अब राइड-शेयर के बजाय समर्पित (डेडिकेटेड) प्रक्षेपण सेवाओं की माँग कर रहे हैं। कंपनी ने हाल ही में 50 करोड़ डॉलर से अधिक के मूल्यांकन पर 1.7 करोड़ डॉलर जुटाए हैं, और उसे यूरोप व ऑस्ट्रेलिया से प्रक्षेपण सेवाओं की माँग मिल रही है। अंतरिक्ष-आधारित डेटा सेंटर और तीव्र प्रक्षेपण प्रणालियाँ जैसे नए उपयोग भविष्य के व्यावसायिक अवसरों के रूप में उभर रहे हैं।

आगे की राह

उद्योग जगत का मानना है कि इंजीनियरिंग प्रतिभा और अपेक्षाकृत कम-लागत क्रियान्वयन के संयोजन के चलते, आने वाले दशक में अंतरिक्ष डेटा भारत के सबसे बड़े डीप-टेक निर्यात अवसरों में से एक बन सकता है।

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