जंगल और अर्ध-पर्वतीय युद्ध-कौशल पर केंद्रित अभ्यास; घात-प्रत्याघात (ऐम्बुश), स्नाइपर ड्रिल, AK-203 फायरिंग और बस-इंटरवेंशन ऑपरेशन इसके प्रमुख हिस्से।
पूर्वोत्तर भारत के मेघालय में इन दिनों एक बड़ा बहुराष्ट्रीय सैन्य अभ्यास 'प्रगति 2026' चल रहा है, जिसमें 13 देशों की सेनाएँ जंगल और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्र में युद्ध-कौशल का प्रशिक्षण ले रही हैं। कठिन भू-भाग में संचालन की दक्षता बढ़ाना इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य है।
विभिन्न देशों के सैनिकों का एक साथ प्रशिक्षण न केवल साझा रणनीति और तालमेल को मज़बूत करता है, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी नया आयाम देता है।
अभ्यास के दौरान घात लगाकर किए जाने वाले हमले (ऐम्बुश रेड), स्नाइपर ड्रिल, AK-203 राइफल से फायरिंग और बस-इंटरवेंशन (बंधक/बस बचाव) जैसे ऑपरेशनों का प्रशिक्षण शामिल है। ये गतिविधियाँ वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप तैयारी सुनिश्चित करती हैं।
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार ऐसे संयुक्त अभ्यास भाग लेने वाले देशों के बीच अंतर-संचालन क्षमता (इंटरऑपरेबिलिटी), साझा तकनीकों और आपसी विश्वास को बढ़ाते हैं। दुर्गम भू-भाग में संचालन का प्रशिक्षण आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने की दृष्टि से विशेष रूप से उपयोगी माना जाता है।
'प्रगति 2026' न केवल भारतीय सेना की मेज़बानी क्षमता और प्रशिक्षण-स्तर को दर्शाता है, बल्कि कई देशों की भागीदारी के ज़रिये क्षेत्रीय सैन्य सहयोग और साझा तैयारी को भी सुदृढ़ करता है।