यूएई से ५ अरब डॉलर का निवेश, रणनीतिक तेल भंडार व रक्षा साझेदारी; इटली के साथ 'विशेष रणनीतिक भागीदारी', नॉर्डिक देशों संग 'हरित प्रौद्योगिकी' गठजोड़ और नीदरलैंड में सेमीकंडक्टर समझौता — व्यापारिक जगत ने बताया 'निर्णायक मोड़'।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की १५ से २० मई तक चली पाँच देशों — संयुक्त अरब अमीरात, नीदरलैंड, स्वीडन, नॉर्वे और इटली — की यात्रा भारत के लिए कूटनीतिक और आर्थिक रूप से बेहद उपलब्धिपूर्ण रही। ऐसे समय में जब पश्चिम एशिया में तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाज़ार दबाव में हैं, इस यात्रा ने ऊर्जा सुरक्षा, रक्षा, निवेश और तकनीक के मोर्चे पर भारत की स्थिति को मज़बूती दी है।
निर्यातकों के संगठन फीयो (FIEO) ने इस दौरे को भारत के व्यापार और निवेश संबंधों के लिए एक 'निर्णायक मोड़' बताया। संगठन के अनुसार उच्चस्तरीय वार्ताओं से इंजीनियरिंग, स्वच्छ ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, फार्मास्युटिकल्स, वस्त्र, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल व्यापार जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए नए अवसर खुलेंगे।
दौरे का पहला पड़ाव अबू धाबी रहा, जहाँ मोदी ने यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन ज़ायद अल नाहयान से प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता की। दोनों देशों ने एक रणनीतिक रक्षा साझेदारी का ढाँचा तय किया तथा ऊर्जा सुरक्षा को केन्द्र में रखते हुए कई समझौते किए।
सबसे अहम करार रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार से जुड़ा रहा, जिसके तहत अबू धाबी की कंपनी एडनॉक (ADNOC) भारत के भूमिगत भंडारों में तीन करोड़ बैरल तक कच्चा तेल रख सकेगी। इसके साथ इंडियन ऑयल और एडनॉक के बीच दीर्घकालिक एलपीजी आपूर्ति समझौता भी हुआ, जिसे आम उपभोक्ता के लिहाज़ से अहम माना जा रहा है।
यूएई ने भारत में ५ अरब डॉलर के निवेश की घोषणा की, जिसमें आरबीएल बैंक और सम्मान कैपिटल के साथ-साथ ढाँचागत क्षेत्र शामिल है। एक शिप-रिपेयर क्लस्टर समझौता और भारत में आठ एक्साफ्लॉप क्षमता वाला सुपरकंप्यूटिंग केंद्र स्थापित करने का प्रस्ताव भी इस यात्रा की उपलब्धियों में रहा।
दूसरे चरण में मोदी नीदरलैंड पहुँचे, जहाँ व्यापार के साथ रक्षा एवं सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर ज़ोर रहा। यात्रा के दौरान भारत की टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स ने डच तकनीकी कंपनी ASML के साथ एक बड़ा सेमीकंडक्टर समझौता किया, जिसे भारत के चिप-निर्माण लक्ष्य की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। दोनों पक्षों ने हरित हाइड्रोजन, नवाचार और जल-प्रबंधन में भी सहयोग पर सहमति जताई।
गोथेनबर्ग में स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने मोदी की यात्रा को द्विपक्षीय संबंधों का 'मील का पत्थर' बताया। दोनों देशों ने अगले पाँच वर्षों में आपसी व्यापार और निवेश दोगुना करने का लक्ष्य रखा। इसके बाद ओस्लो में तीसरे भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन में भारत और नॉर्डिक देशों — नॉर्वे, स्वीडन, फ़िनलैंड, आइसलैंड व डेनमार्क — ने अपने रिश्ते को 'हरित प्रौद्योगिकी एवं नवाचार रणनीतिक साझेदारी' के स्तर तक उठाने का निर्णय लिया, जिसका लक्ष्य स्वच्छ-हरित संक्रमण, व्यापार-निवेश और 'ब्लू इकॉनमी' में सहयोग बढ़ाना है।
स्वीडन ने मोदी को अपने सर्वोच्च नागरिक सम्मान 'रॉयल ऑर्डर ऑफ़ द पोलर स्टार' से तथा नॉर्वे के राजा हैराल्ड पंचम ने 'रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ़ मेरिट ग्रैंड क्रॉस' से सम्मानित किया।
यात्रा के अंतिम चरण में रोम में प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ हुई वार्ता में भारत-इटली संबंधों को 'विशेष रणनीतिक भागीदारी' के स्तर पर उठाया गया। बातचीत में व्यापार, एआई, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा सहयोग प्रमुख रहे। मोदी को संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के 'एग्रिकोला मेडल २०२६' से भी सम्मानित किया गया।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस वर्ष की शुरुआत में संपन्न भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (FTA) ने इस पूरी यात्रा को ठोस आधार दिया है। दोनों पक्षों ने वर्ष २०२९ तक द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर २० अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। भारत-EFTA TEPA के साथ मिलकर ये समझौते आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक सुदृढ़ बनाने और भारतीय निर्यातकों को यूरोपीय बाज़ार तक व्यापक पहुँच देने में सहायक होंगे।
कुल मिलाकर, ऊर्जा सुरक्षा से लेकर सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और रक्षा तक — यह पाँच-देशीय यात्रा भारत की 'विश्वसनीय आर्थिक भागीदार' के रूप में बढ़ती साख और खाड़ी व यूरोप के साथ गहराते रिश्तों का स्पष्ट संकेत है।