"CJP नेतृत्व की मेहनत, हज़ारों छात्रों की शांतिपूर्ण आवाज़, और दिल्ली की सड़कों पर बनी अनुशासित उपस्थिति ने वह कर दिखाया है जो कोई हिंसक भीड़ नहीं कर सकती थी। अब ज़िम्मेदारी दोगुनी हो गई है। जो जीत मेहनत से आई है, वह कुछ मिनटों की अव्यवस्था से कमज़ोर पड़ सकती है। भारत संवाद सभी प्रदर्शनकारियों, CJP नेतृत्व और दिल्ली पुलिस से अपील करता है — शांतिपूर्ण समाप्ति ही इस आंदोलन की असली विरासत है।"
यह जीत सिर्फ़ आंदोलन की नहीं है। यह पूरे लोकतंत्र की है। जब हज़ारों छात्र दिल्ली की सड़कों पर उतरे, जब उन्होंने अपनी माँगें शांतिपूर्ण ढंग से रखीं, जब उन्होंने बिना पत्थर उठाए, बिना गाली दिए, बिना किसी संपत्ति को नुक़सान पहुँचाए, अपनी बात लोकतांत्रिक तरीक़े से मनवाई — तो यह भारतीय गणराज्य की सबसे मूल्यवान परंपरा की जीत थी। असहमति का अधिकार, शांतिपूर्ण सभा का अधिकार, और सुने जाने का अधिकार — ये तीनों संविधान के अनुच्छेद 19 में हमें मिले हैं। CJP नेतृत्व और उसके साथ जुड़े हज़ारों छात्रों ने यह साबित कर दिया कि इन अधिकारों का इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
लेकिन आज, जब जीत सामने खड़ी है, एक ज़िम्मेदारी भी सामने है। जो सम्मान अनुशासित संघर्ष से मिला है, वह क्षणिक अव्यवस्था से खो सकता है। जो विश्वास हज़ारों नागरिकों ने इस आंदोलन पर जताया है, वह किसी एक हिंसक घटना से टूट सकता है। इसीलिए भारत संवाद आज सुबह उन तमाम प्रदर्शनकारियों से एक स्पष्ट अपील करता है — अब शांति और अनुशासन के साथ लौटने का समय है।
आंदोलन की सफलता तीन बातों में मापी जाती है — पहला, क्या माँगें मानी गईं; दूसरा, क्या यह प्रक्रिया लोकतांत्रिक थी; और तीसरा, क्या इसकी समाप्ति गरिमापूर्ण रही। पहले दो सवालों के जवाब CJP के पक्ष में हैं। तीसरा सवाल अभी बचा हुआ है। इसका उत्तर आने वाले घंटों और दिनों में लिखा जाएगा — और यह उत्तर लिखने की ज़िम्मेदारी हर उस छात्र पर है जो आंदोलन में शामिल रहा है।
गांधी जी ने कहा था कि साधन ही साध्य की गुणवत्ता तय करते हैं। जो शांतिपूर्ण तरीक़े से जीत हासिल की गई है, उसे शांतिपूर्ण तरीक़े से समाप्त करना — यह उसी सिद्धांत का विस्तार है। हज़ारों छात्रों की भीड़ में हमेशा कुछ शरारती तत्व घुसने की कोशिश करते हैं। जब आंदोलन जीत के मुहाने पर होता है, तब यह ख़तरा और बढ़ जाता है। कुछ लोग चाहते ही हैं कि अंतिम क्षणों में हिंसा हो, ताकि पूरे आंदोलन की छवि ख़राब हो सके, ताकि माँगें मान लिए जाने पर पछतावा हो सके, ताकि आगे किसी ऐसे आंदोलन की राह मुश्किल हो जाए।
CJP नेतृत्व को यह सुनिश्चित करना होगा कि ऐसा कोई मौक़ा उन तत्वों को न मिले। जो नेता आज छात्रों को शांतिपूर्ण वापसी का संदेश दे सकते हैं, वे कल के लिए एक ऐसी विरासत छोड़ेंगे जिस पर पूरा देश गर्व करेगा।
लोकतंत्र की परीक्षा तब नहीं होती जब सब कुछ ठीक चल रहा हो। असली परीक्षा तब होती है जब सड़कों पर तनाव हो, जब भावनाएँ उबाल पर हों, जब हज़ारों लोग एक साथ खड़े हों। ऐसे समय में जो लोकतांत्रिक व्यवहार बचा रहता है, वही असली लोकतंत्र होता है।
पिछले कुछ दिनों में CJP आंदोलन ने यह परीक्षा पास की है। छात्रों ने संयम दिखाया। नेतृत्व ने रणनीति दिखाई। दिल्ली पुलिस ने भी बड़े पैमाने पर संवेदनशीलता के साथ मामले को संभाला। अगर आज इसका समापन गरिमापूर्ण होता है, तो यह भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय बन जाएगा। अगर अंतिम घंटों में कोई अप्रिय घटना हो गई, तो सारी मेहनत पर एक धुँधली परत चढ़ जाएगी।
यह विकल्प अभी हमारे हाथ में है।
हर बड़े आंदोलन के अंतिम चरण में कुछ लोग जान-बूझकर घुसते हैं, जो न आंदोलन का हिस्सा होते हैं, न ही जिनका कोई सैद्धांतिक जुड़ाव होता है। इनका एक ही उद्देश्य होता है — अराजकता फैलाना। कभी ये किसी विरोधी राजनीतिक स्वार्थ से जुड़े होते हैं, कभी किसी बाहरी एजेंडे से, और कभी सिर्फ़ अवसरवादी हिंसक तत्व होते हैं जो भीड़ की आड़ में शहर में उपद्रव करना चाहते हैं।
CJP आंदोलन में शामिल हर छात्र से भारत संवाद की अपील है — इन तत्वों को पहचानिए। जब कोई अजनबी अचानक हिंसक नारे लगाने लगे, जब कोई पत्थर उठाने की बात करे, जब कोई तोड़फोड़ की तरफ़ भीड़ को ले जाना चाहे — तुरंत उससे दूरी बनाइए। संभव हो तो उसे रोकिए। संभव न हो तो पुलिस को सूचित कीजिए। एक शरारती तत्व की पहचान और उससे दूरी — यह हर लोकतांत्रिक प्रदर्शनकारी का सबसे बड़ा योगदान है।
नेतृत्व की ज़िम्मेदारी और भी अधिक है। CJP के जो साथी संगठन-स्तर पर काम कर रहे हैं, उन्हें अपने-अपने समूहों में यह संदेश स्पष्ट करना होगा। अनुशासित रूप से लौटना कोई कमज़ोरी नहीं है — यह असली ताक़त है।
आगे का रास्ता एक साझी ज़िम्मेदारी की माँग करता है। CJP नेतृत्व को शांतिपूर्ण विसर्जन का एक स्पष्ट कार्यक्रम घोषित करना होगा — कब, कहाँ, किस क्रम में छात्र लौटेंगे। यह कार्यक्रम खुले तौर पर साझा किया जाए, ताकि हर प्रदर्शनकारी को स्पष्ट हो कि कब क्या करना है। अफ़वाहों और भ्रम की जगह वैध निर्देशों को लेनी चाहिए।
दिल्ली पुलिस से भी एक अपील है। जब आंदोलन शांतिपूर्ण ढंग से समापन की ओर बढ़ रहा हो, तब पुलिस की भूमिका सहायक होनी चाहिए, दमनकारी नहीं। मार्ग सुगम कीजिए। परिवहन की व्यवस्था कीजिए। पानी और चिकित्सा सेवाएँ उपलब्ध रखिए। और सबसे महत्वपूर्ण — शरारती तत्वों पर पैनी नज़र रखिए, लेकिन सच्चे प्रदर्शनकारियों के साथ संयम बरतिए।
दोनों पक्षों के बीच का यह सहयोग जो अब बनेगा, वही आगे के हर लोकतांत्रिक आंदोलन के लिए एक मानदंड बनेगा। भविष्य के छात्रों को दिखाइए कि आंदोलन कैसे शुरू होता है, कैसे चलता है, और कैसे गरिमापूर्ण ढंग से समाप्त होता है। यह सीख किसी पाठ्यपुस्तक में नहीं मिलेगी — यह आज की सड़कों पर लिखी जा रही है।
आंदोलन के बाद क्या होगा — यह सवाल भी अभी से सोचने का समय है। जीत के बाद जो प्रक्रियात्मक कार्य होते हैं, उन पर CJP नेतृत्व को अपने साथियों के साथ मिलकर काम करना होगा। माँगों की स्वीकृति के बाद उनके क्रियान्वयन की निगरानी, नीतिगत बदलावों का अनुसरण, और सरकार-प्रशासन के साथ रचनात्मक संवाद — ये आगे की चुनौतियाँ हैं। सड़क का आंदोलन एक चरण था; अब संस्थागत निगरानी का चरण शुरू होता है।
छात्रों के लिए भी एक सीख है — लोकतंत्र में हर आवाज़ की जगह है, बशर्ते वह शांतिपूर्ण हो, तर्कसंगत हो, और संविधान की मर्यादा में हो। CJP आंदोलन इस बात का उदाहरण है कि नई पीढ़ी अपने अधिकारों के प्रति सजग है, अपनी माँगों के प्रति स्पष्ट है, और अपने साधनों के प्रति ज़िम्मेदार है।
आज सुबह भारत संवाद उन तमाम छात्रों को बधाई देता है जिन्होंने पिछले कई दिनों तक शांतिपूर्ण संघर्ष के ज़रिए अपनी माँगें मनवाईं। यह उनकी जीत है — और उतनी ही यह भारतीय लोकतंत्र की जीत है। लेकिन यह जीत तभी संपूर्ण होगी जब आंदोलन का समापन उतनी ही गरिमा के साथ होगा जितनी गरिमा के साथ इसका संचालन हुआ था।
CJP नेतृत्व से अपील है — अब शांतिपूर्ण वापसी का स्पष्ट आह्वान कीजिए। छात्रों से अपील है — अनुशासन के साथ लौटिए, शरारती तत्वों से बचिए। दिल्ली पुलिस से अपील है — इस अंतिम चरण को सम्मानजनक बनाने में सहयोग कीजिए।
आंदोलन ने दिखा दिया कि लोकतंत्र में शांतिपूर्ण आवाज़ की क्या ताक़त होती है। अब समापन दिखाए कि उस ताक़त की गरिमा क्या होती है।
*जीत की असली परीक्षा उसकी शुरुआत नहीं, उसका अंत होता है।*
"सी. जे. पी. के नेतृत्व की महानता, हज़ारों खतरों की शांति की आवाज, और दिल्ली की निराशा पर बनी अपेक्षाओं को कम करने के लिए जो कुछ भी हो सकता है, वह नहीं कर सकता है।
यह जीत सिरोफ़ आंदोलन की कमी नहीं है। यह पूरी तरह से नियंत्रण की बात है। जब हवाएँ चलती हैं तो दिल्ली की समस्याएँ आपके ऊपर आती हैं, जब आपके ऊपर होती हैं, तो आप एक कदम पीछे हट जाते हैं।
लेकिन आज, जब जीत समान होती है, एक समान अवसर भी होता है। जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है, जो सम्मान मिलता है।
इंदौर की तीन छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी छोटी
गांधी जी ने कुछ नहीं कहा था कि कुछ भी नहीं किया गया था और कुछ भी नहीं किया गया था। जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है, जो शांति की बात है
सी. जे. पी. को यह सुनियोजित करना होगा जो कुछ भी हो सकता है वह है जो मुझे नहीं मिलता है। जो आता है और आज शांति होती है तो शांति होती है।
लोकतांत्र की परीक्षा तब नहीं होती थी जब सब कुछ ठीक रहता था।
पीछे कुछ दिन में सी. जे. पी. का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है। पीछे कुछ नहीं है तो सी. जे. पी. का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों की संख्या में वृद्धि हुई है।
यह विकास अभी भी हमारे साथ है।
हर बड़े उद्योग के अंतर्राष्ट्रीय चरण में कुछ कुछ लोगों को रोजगार मिलता है, जो कुछ भी नहीं होता है, जो कुछ भी नहीं होता है, जो कुछ भी नहीं होता है, जो कुछ भी हो सकता है, जो कुछ भी हो सकता है, जो कुछ भी हो सकता है, जो कुछ भी हो सकता है।
सी. जे. पी. में शम्मील हर शहर से भारत के संपर्क में आने वाले लोगों की संख्या इतनी अधिक है कि जब कोई आदमी अपनी पसंद की चीज़ों के बारे में सोचेगा तो उसे बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले में बदले
सी. जे. पी. के जो साथी संगठन-केंद्र पर काम कर रहे हैं, वे अपने आप से जुड़े हुए हैं।
सी. जे. पी. को शांति स्थापित करने का अधिकार है जो एक विशेष राष्ट्र के अधिकार क्षेत्र में हो सकता है-कब, कहां, किस वजह से मैं उत्तर प्रदेश में काम कर सकता हूं।
दिल्ली पुलिस से भी एक अपील है। जब अंग्रेजी का प्रसारण शांति के लिए किया जाता है तो उस समय के पुलिस अधिकारियों का कहना होता है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि दिल्ली पुलिस
दोनो देशों के बीच का यह संघर्ष जो अब बना हुआ है, जो पहले भी हो चुका है और हर जगह पर भी हो रहा है।
अंग्रेजी के बाद क्या हुआ-यह स्वाल भी अभी भी सचने का समय है। जीत के बाद जो सही हो सकता है, जो हम सी. जे. पी. के लिए सही है, जो हम सी. जे. पी. के लिए सही है।
खतरों के लिए भी एक सीख है-लोकतंत्र में हर आवाज है, देश में शांति हो, शांति हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो, सुरक्षा हो
आज का शुभ भारत संवाद उनके लिए अच्छा है कि उन्हें पीछे छोड़ दिया जाए ताकि शांति स्थापित की जा सके।
सी. जे. पी. से अपेक्षा यह है कि अब शांति की अपेक्षा करने की आवश्यकता है। अपेक्षा से अपेक्षा करने की आवश्यकता है। अपेक्षा से अपेक्षा करने की आवश्यकता है। अपेक्षा से अपेक्षा करने की आवश्यकता है। अपेक्षा से अपेक्षा करने की आवश्यकता है।
आंदोलन ने दीखा दिवस की ताकत में शांति लाने के लिए क्या किया जा सकता है। अब इस बात का ध्यान रखा जा सकता है कि यह घर में क्या हो रहा है।
जीत की असली परीक्षा उसकी सुरक्षा नहीं है, उसका अंत होता है।
"سی جے پی نیترو کی عظمت، ہجرون شترووں کی شانتی پوران آواج، اور دلّی کی پریشانی پر بنی تشہیر کو بہتر بنانے کے لیے نیے وہ کر دکھائے یہ ہے کہ کون سی چیز نہیں کر سکتی ہے۔
یہ جیت سرف آنڈولن کی کوئی بات نہیں ہے۔ یہ مکمل لوکانتر کی بات ہے۔
لیکن آج، جب جیت کے وقت کی کھڑکی ہے، ایک وقت کی کمی بھی ہے۔ جو وقت کا تجزیہ کرتا ہے، وہ ملک سے ملتا ہے، وہ ملک سے ملتا ہے، جو وشواس سے ہوتا ہے۔
اندرون کی فلٹا تین چیزیں پہلے، کیا مانگتی ہیں ؛ دوسرہ، کیا یہ پیش کش ہوتی ہے کہ لوگ کیسے کام کرتے ہیں ؛ اور اس کی آبادی کیا ہوتی ہے، اس کی آبادی کیا ہوتی ہے اور کیا نہیں ہوتی ہے۔
گاندھی جی نے کچھ نہیں کہا تھا کہ اس کے ساتھ کچھ بھی کرنا ہے۔ جو شانتی پوروں کا تیسرا حصہ جیت سے ہوتا ہے، اس سے شانتی پوروں کا تیسرا حصہ آتا ہے۔ یہ اس کے گھر سے آتا ہے۔
سی جے پی کو یہ سنیشچت کرنا ہوگا جس کی وجہ سے ان میں سے کسی نے ان سے ملاقات نہیں کی۔
لوکتنٹر کی حکومت تب نہیں ہوتی تھی جب سب کچھ کافی ہوتا تھا۔ اس طرح کی حکومت تب ہوتی ہے جب یہ مشکل ہوتا ہے تو جب یہ ممکن ہوتا ہے تو جب یہ ممکن ہوتا ہے تو جب یہ ممکن ہوتا ہے، تب یہ ممکن ہوتا ہے کہ لوگ ایک ساتھ کام کریں۔
پچھلے کچھ دن میں سی جے پی اندرون کو یہ سب کچھ پسند نہیں ہے۔ شترووں کو سماج نہیں دیکھنا ہے۔ نیترو کو ریاست نہیں بنانا ہے۔ دلّی پلس کو بھی بدلنا ہے۔
یہ فیصلہ ابھی بھی ہمارے ساتھ ہے۔
ہر بڑے آندرے کے بین الاقوامی چرانے میں کچھ لوگ جانا-جانا لگتا ہے، جو نہیں آندرے کا احساس ہوتا ہے، نہ ہی زندگی کا کوئی مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز بنتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے، نہ ہی انصاف کا مرکز ہوتا ہے۔
سی جے پی کے اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر آگے بڑھتے ہیں۔
قوم کی جماعت اور بھی مزید ہے۔ سی جے پی کے جو ساتھی اتحاد کے مرکز پر کام کر رہے ہیں، وہ اپنے آپ سے رابطے میں ہیں۔
سی جے پی کے اتحاد کو شانتی پوروں کے انتظام کے لیے ایک جگہ کا حق حاصل ہے۔ اس جگہ کا حق حاصل کرنے کے لیے ایک جگہ کا حق حاصل ہے۔ کب، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں، کہاں،
دلّی پلس سے بھی ایک اپیل ہے۔ جب آندولن شانتی پور سے رابطہ ہوتا ہے تو پھر اس کی بھومیکا سہیک ہونی چاہیے، دمانکاری نہیں۔
دونوں کے بیچ کا یہ مقابلہ جو اب بنا ہوا ہے، وہ پھر سے اس کے اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر اندر
اندرون کے بعد کیا ہوتا ہے-یہ سوال بھی ابھی سے سوچنے کا وقت ہے۔ جیت کے بعد جو ضرورت ہوتی ہے وہ ہے، ان پر سی جے پی کے نیترو کو آپ کے ساتھ مل کر کام کرنا۔
چھتروں کے لیے بھی ایک سیکھ ہے-لوکانتر میں ہر آواز کی گھاٹ ہے، جہاں وہ شانتی پور ہوں، مرکز ہو، اور مرکز کے لیے انصاف میں ہوں۔ سی جے پی کا اندرون اس بات کا دور ہے جس کا کوئی جواب نہیں ہے۔
آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ ان کے تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ ان کے تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔ آج سب سے پہلے بھارت کے ساتھ تعلقات کو بہتر بنانے کی کوشش کی جا رہی ہے۔
سی جے پی سے اپیل ہے-اب شانتی پورشن سے اپیل ہے-اس سے زیادہ اپیل ہے-تجزیہ کے ساتھ ساتھ لوٹے، شریرتی تتوں سے لے کر چنتا ہے۔ دلّی پلس سے اپیل ہے-اس کے اندر ایک مسئلہ ہے۔
اندرون نی دیکھا دیا کے لوکانتر میں شانتی پوران آواج کی کیا قوت ہوتی ہے۔ اب اس وقت اس کی گرما کی طاقت ہوتی ہے۔
جیت کی اسلی پریکشا اس کی جلد نہیں، اس کا اندر ہوتا ہے۔