भारत संवाद
पृष्ठ 03 : ऊर्जा
विशेष आलेख
बुधवार, 27 मई 2026 : bharatsamvad-epaper
ऊर्जा क्रांति   •   विशेष रिपोर्ट

भारत बना दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट,
स्वच्छ ऊर्जा की दौड़ में अमेरिका को पीछे छोड़ नई ऊंचाई

चीन अब भी पहले स्थान पर है, जबकि भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़कर वैश्विक सौर ऊर्जा बाजार में दूसरा स्थान हासिल किया है। रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन के बल पर देश की कुल सौर क्षमता 155 गीगावॉट से आगे निकल गई है, जो ऊर्जा आत्मनिर्भरता, हरित विकास और टिकाऊ भविष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

भारत ने वैश्विक सौर ऊर्जा परिदृश्य में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है। लगातार रिकॉर्ड स्तर पर सौर परियोजनाओं के जुड़ने से भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर मार्केट बन गया है। चीन अभी भी पहले स्थान पर है, जबकि अमेरिका तीसरे स्थान पर खिसक गया है। यह उपलब्धि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश के स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों की ओर तेज प्रगति का सशक्त प्रमाण है।

देश की कुल संचयी सौर क्षमता अब 155 गीगावॉट से अधिक हो चुकी है, जो भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता और टिकाऊ विकास की दिशा में महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

रिकॉर्ड इंस्टॉलेशन का असर

उपयोगिता पैमाने की बड़ी परियोजनाओं के साथ-साथ रूफटॉप सोलर के तेजी से बढ़ते अपनाने ने कुल सौर क्षमता को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया है। निवेशकों का बढ़ता भरोसा, बेहतर वित्तीय व्यवहार्यता और सौर परियोजनाओं के सुचारु क्रियान्वयन ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा पारिस्थितिकी तंत्र को और मजबूत किया है।

विश्व रैंकिंग में भारत

वैश्विक स्तर पर चीन सबसे आगे है, जिसने अब तक समग्र सौर क्षमता में बढ़त बनाए रखी है। भारत ने अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है। यह बदलाव भारत में तेज परियोजना निष्पादन, अनुकूल नीतियों और नवीकरणीय ऊर्जा के प्रति बढ़ते राष्ट्रीय संकल्प का परिणाम है।

भारत के लिए इसका महत्व

यह उपलब्धि ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ाती है, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता घटाती है और विदेशी ऊर्जा आयात पर खर्च कम करती है। सौर ऊर्जा से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है, स्वच्छ पर्यावरण को बढ़ावा मिलता है और दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होती है।

साझा विकास की भावना

सौर ऊर्जा का विस्तार केवल उत्पादन के आंकड़ों तक सीमित नहीं है। यह घरेलू उपभोक्ताओं को सस्ती और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराने, किसानों को सौर पंप और सोलर समाधानों से राहत देने, छोटे उद्योगों को ऊर्जा लागत कम करने और बड़े उद्योगों को हरित ऊर्जा विकल्प प्रदान करने में सहायक है। इससे रोजगार सृजन, ग्रामीण विकास और राष्ट्रीय विकास की गति को मजबूती मिलती है।

“155 गीगावॉट से अधिक सौर क्षमता के साथ भारत अब केवल ऊर्जा उपभोक्ता नहीं, बल्कि स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन का वैश्विक अग्रदूत बनकर उभर रहा है।”
— ऊर्जा क्षेत्र के जानकार

मोदी सरकार की स्वच्छ ऊर्जा दिशा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के विस्तार, सौर विनिर्माण को प्रोत्साहन, अवसंरचना विकास, अनुसंधान और नवाचार में निरंतर निवेश तथा नीतिगत सुधारों के माध्यम से स्वच्छ ऊर्जा पर गहन ध्यान केंद्रित किया है। राष्ट्रीय सौर मिशन, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन, ग्रीन ओपन एक्सेस और राज्यों के लक्ष्यों ने मिलकर सौर ऊर्जा विकास को नई गति दी है।

यह प्रगति भारत के विकास और पर्यावरणीय संतुलन के बीच प्रभावी तालमेल को दर्शाती है। स्वच्छ ऊर्जा की यह दिशा आने वाले वर्षों में देश की ऊर्जा जरूरतों को अधिक सुरक्षित, टिकाऊ और आत्मनिर्भर आधार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

शांति और पर्यावरण का संदेश

सौर ऊर्जा का विस्तार स्वच्छ पर्यावरण और दीर्घकालिक स्थिरता की दिशा में बड़ा कदम है। कम उत्सर्जन, स्वच्छ हवा और प्रकृति के अनुकूल विकास का संदेश भारत की ऊर्जा नीति को जनहित से जोड़ता है।

आगे की राह

भविष्य में ऊर्जा भंडारण समाधान, ग्रिड अवसंरचना का आधुनिकीकरण, घरेलू सौर विनिर्माण को मजबूती, कौशल विकास और हरित रोजगार के क्षेत्र में अवसरों का विस्तार भारत को स्वच्छ ऊर्जा नेतृत्व की ओर और आगे बढ़ाएगा। सस्ती, विश्वसनीय और स्वच्छ बिजली उपलब्ध कराना ही लक्ष्य है, ताकि भारत आर्थिक विकास को तेज करते हुए जलवायु प्रतिबद्धताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर सके।